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प्रयागराज : अधिवक्ता का शस्त्र लाइसेंस बहाल करने से इन्कार,  अपराध में बरी होने पर दोबारा आवेदन की छूट

उत्तर प्रदेश

प्रयागराज, 30 सितंबर । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कासगंज जिला न्यायालय के एक अधिवक्ता का शस्त्र लाइसेंस निरस्त करने के आदेश में हस्तक्षेप से इन्कार कर दिया। न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने बिजेंद्र कुमार उर्फ विजेंद्र चौहान की याचिका निस्तारित करते हुए यह फैसला सुनाया।

याचिकाकर्ता ने खुद को कासगंज जिला न्यायालय का सक्रिय अधिवक्ता बताया। उनका शस्त्र लाइसेंस वर्ष 2003 में जारी हुआ था। उनके विरुद्ध कुल 10 आपराधिक मामले दर्ज हुए, जिनमें से 9 में या तो बरी करने का निर्णय आया या जांच में उन्हें दोषमुक्त पाया गया। एक मामला अब भी विचाराधीन है, जिसमें आरोपपत्र दाखिल हो चुका है और आरोप तय किए जा चुके हैं।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कहा कि राजनीतिक रंजिश के कारण मुकदमे दर्ज कराए गए थे। अधिकांश में बरी हो चुके हैं और अब केवल एक मामला लंबित है, इसलिए लाइसेंस गलत तरीके से निरस्त किया गया और अपील भी खारिज कर दी गई। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता कई आपराधिक मामलों में शामिल रहा है। कुछ में बरी होने के बावजूद एक मामले में विचारण लंबित है, जिसमें नैतिक अधमता के आरोप हैं। कोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर यह नहीं माना जा सकता कि लाइसेंस रखने की अनुमति देना लोक शांति और लोक सुरक्षा के लिए हानिकारक नहीं होगा। इसलिए आक्षेपित आदेशों में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।

याचिका निस्तारित करते हुए कोर्ट ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता लंबित आपराधिक मामलों में भी बरी हो जाता है, तो वह लाइसेंसिंग अथॉरिटी के समक्ष लाइसेंस बहाली का आवेदन दे सकता है। अथॉरिटी उस आवेदन पर बाद की घटनाओं को ध्यान में रखकर विचार करेगी।