won-gold-in-asian-games

हिसार के अंकुश पंघाल ने एशियन गेम्स में जीता गोल्ड, गांव भेरियां में जश्न

हरियाणा

गया। परिवार के सदस्यों ने घर पर मुकाबला लाइव देखा और अंकुश की जीत के बाद जश्न मनाया।

अंकुश के देश लौटने पर गांव में स्वागत और जुलूस निकालने की तैयारियां भी शुरू कर दी

फाइनल मुकाबले में अंकुश ने शुरुआत से ही मजबूत डिफेंस के साथ सटीक काउंटर

पंच लगाए। तीनों राउंड में उन्होंने दक्षिण कोरिया के मुक्केबाज पर दबाव बनाए रखा।

दूसरे और तीसरे राउंड में अंकुश की काउंटर अटैकिंग शैली विशेष रूप से प्रभावी रही।

मुकाबले में पांच में से चार जजों ने अंकुश के पक्ष में फैसला दिया। एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने से पहले अंकुश पंघाल कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में

भी 80 किलोग्राम भार वर्ग का स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने

भी कॉमनवेल्थ गेम्स में अंकुश की स्वर्णिम उपलब्धि पर उन्हें बधाई दी थी।

अंकुश ने वर्ष 2017 में महज 11 साल की उम्र में बॉक्सिंग शुरू की थी। छह भाई-बहनों

के परिवार में पले-बढ़े अंकुश का खेलों की ओर रुझान अपनी बहन और भाई को देखकर बढ़ा।

कोच प्रवीण सावंत की सलाह पर उनके पिता सुरेश पंघाल ने बेटे के सपने को पूरा करने के

लिए गांव से करीब 15 किलोमीटर दूर प्रशिक्षण केंद्र तक रोज ले जाने और वापस लाने की

करियर के शुरुआती दौर में अंकुश को छोटी उम्र और कद-काठी को लेकर लोगों की

बातों का सामना करना पड़ा, लेकिन परिवार ने उनका हौसला बनाए रखा। वर्ष 2018 में पहली

स्टेट चैंपियनशिप के फाइनल में हार के बाद अंकुश ने बॉक्सिंग छोड़ने तक का मन बना लिया

था। पिता सुरेश और कोच प्रवीण सावंत ने उन्हें समझाया कि एक हार से सफर खत्म नहीं होता।

इसके बाद अंकुश ने दोगुनी मेहनत के साथ वापसी की और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर

पर अपनी पहचान बनाई। अब एशियन गेम्स के फाइनल में गोल्ड जीतकर अंकुश ने अपने परिवार,

गांव और हिसार को एक और बड़ी उपलब्धि दी है। उनका यह प्रदर्शन भारतीय बॉक्सिंग के लिए

भी खास रहा, क्योंकि अंकुश 2018 के बाद एशियन गेम्स में पुरुष बॉक्सिंग का स्वर्ण जीतने