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धार्मिक ग्रंथों में वर्णित जीवन मूल्यों के अनुरूप आचरण करें : डीवाई चंद्रचूड़

दिल्ली

नई दिल्ली, 02 नवंबर । धार्मिक ग्रंथों में वर्णित जीवन मूल्यों के अनुरूप आचरण करने वाले व्यक्ति संतोष और प्रसन्नता का अनुभव करते हैं। संसार के सभी प्राणी द्वेष और शत्रुता त्यागकर एक-दूसरे के प्रति मैत्रीभाव विकसित करें। यह विचार देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने यहां के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा आयोजित माता भगवती देवी शर्मा के जन्मशताब्दी एवं अखंड दीप शताब्दी महोत्सव के समापन समारोह में व्यक्त किए।

तीन दिवसीय महोत्सव का समापन ज्ञान यज्ञ की मशाल रैली और विश्व कल्याण के महासंकल्प के साथ हुआ। समारोह में विचार क्रांति, मानवीय एकता, सामाजिक सद्भाव और नवयुग निर्माण का संदेश दिया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि जन्मशताब्दी महोत्सव का समापन युग निर्माण की यात्रा का अंत नहीं, बल्कि गुरुदेव-माताजी के संकल्पों को नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ाने का अवसर है।

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने संत ज्ञानेश्वर रचित ‘पसायदान’ के छंदों का उल्लेख करते हुए मानवीय मूल्यों की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने दुष्प्रवृत्तियों के अंत, सत्कर्मों के प्रति अनुराग और सभी प्राणियों के बीच मैत्रीभाव विकसित करने के संदेश की व्याख्या की।

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि धार्मिक ग्रंथों में वर्णित जीवन मूल्यों के अनुरूप आचरण करना मानव जीवन को संतोष और प्रसन्नता से भरता है। सदाचार, परस्पर प्रेम और मानवीय संवेदनाओं को जीवन में उतारना आवश्यक है। संसार के सभी प्राणी एक-दूसरे के प्रति द्वेष और शत्रुता की भावना त्यागकर मित्रवत व्यवहार करें।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि माता भगवती देवी शर्मा का संपूर्ण जीवन सेवा, समर्पण, सादगी और समन्वय की अनुपम मिसाल है। गायत्री परिवार मानवीय मूल्यों, आध्यात्मिक चेतना और समाज कल्याण के आदर्शों से जुड़ा विशाल परिवार है। गुरुदेव-माताजी के तप, त्याग और लोकमंगल के संकल्पों ने इस परिवार को व्यापक सामाजिक चेतना का स्वरूप दिया है। माताजी के जीवन आदर्श आज भी सेवा, सद्भाव और सामूहिक सहयोग के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणा दे रहे हैं।

विदाई सत्र में ‘ज्योति कभी नहीं बुझेगी’ विषय पर समारोह के दलनायक एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने वर्ष 2026 को गायत्री परिवार के लिए ‘सौभाग्य का प्रयाग’ बताया। उन्होंने कहा कि यह वर्ष ऐतिहासिक उपलब्धियों, आध्यात्मिक साधना और गुरुदेव-माताजी के संकल्पों के संगम का पावन अवसर है।

डॉ. पण्ड्या ने कहा कि ‘गायत्री परिवार गुरुदेव का खोया-पाया विभाग है।’ गुरुदेव के विचारों और आदर्शों से दूर होती मानवीय चेतना को पुनः जोड़ना तथा उनके संकल्पों को समाज में प्रतिष्ठित करना प्रत्येक गायत्री परिजन का दायित्व है।

समापन अवसर पर निकाली गई ज्ञान यज्ञ की मशाल रैली ने विश्व शांति, मानवीय एकता, सामाजिक सद्भाव और सकारात्मक चिंतन का संदेश दिया। मशाल के माध्यम से गुरुदेव-माताजी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने तथा व्यक्ति निर्माण, परिवार निर्माण और राष्ट्र निर्माण के संकल्पों को व्यापक जनांदोलन का स्वरूप देने का आह्वान किया गया।

तीन दिवसीय महोत्सव के समापन ने यह संदेश दिया कि गुरुदेव-माताजी के युग निर्माण संकल्पों की यात्रा निरंतर जारी रहेगी। ज्ञान यज्ञ की मशाल अखंड प्रेरणा, विचार क्रांति और विश्व कल्याण के अभियान को आगे बढ़ाने का प्रतीक बनी। इस अवसर पर दिल्ली सहित आयोजन में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले साधकों को सम्मानित किया गया।