सम्मानित किया गया और हस्तनिर्मित बैलगाड़ी स्मृति चिह्न के रूप में भेंट की गई।
माध्यम से हड़प्पाकालीन सभ्यता की विकसित जीवनशैली और तकनीकी दक्षता को दर्शाया गया।
यहां प्राचीन नगरों की नियोजन व्यवस्था, गलियों की संरचना, जल निकासी प्रणाली, स्नानागार
और जल संरक्षण से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी प्रस्तुत की गई। कृषि व्यवस्था और दैनिक
जीवन में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं के माध्यम से उस समय के सामाजिक और आर्थिक जीवन
साक्ष्य, योग परंपरा, पहिए और बैलगाड़ी से जुड़े प्रमाण भी शामिल किए गए। तांबे के
दर्पण, मिट्टी के बर्तन, लेखन सामग्री और पूजा स्थलों से जुड़े अवशेषों ने प्राचीन
समाज की कला, परंपराओं और रहन-सहन के विभिन्न पहलुओं को सामने रखा। हर्बल सफाई उत्पादों
से संबंधित जानकारी और डीएनए अवशेषों के वैज्ञानिक विश्लेषण से जुड़े विषय भी प्रदर्शनी
का हिस्सा रहे। इन सामग्रियों के माध्यम से आगंतुकों को प्राचीन सभ्यता के तकनीकी ज्ञान,
लेकर पुरातात्विक खोज की प्रक्रिया को करीब से समझा। इस गतिविधि में दिखाया गया कि
खुदाई के दौरान प्राप्त वस्तुओं की पहचान किस प्रकार की जाती है और उन्हें सुरक्षित
रखकर वैज्ञानिक अध्ययन के लिए कैसे तैयार किया जाता है। पुरातात्विक उत्खनन में सावधानी
और व्यवस्थित प्रक्रिया का विशेष महत्व होता है, क्योंकि मिट्टी के भीतर मिले छोटे-छोटे
अवशेष भी प्राचीन सभ्यता के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दे सकते हैं।
आमजन, विशेषकर विद्यार्थियों और युवाओं को पुरातत्व के प्रति जागरूक करने में सहायक
हैं। इससे उन्हें अपनी ऐतिहासिक विरासत को समझने और उसके संरक्षण के महत्व को जानने
और उद्यमियों की ओर से लगाए गए स्टॉल का निरीक्षण किया। उन्होंने स्टॉल संचालकों से
उनके उत्पादों, गतिविधियों और उपलब्धियों के बारे में जानकारी ली। ऐसे आयोजन स्थानीय
उत्पादों, पारंपरिक शिल्प और उद्यमिता को बढ़ावा देने के साथ उत्पाद निर्माताओं को
अपने सामान की विशेषताएं लोगों तक पहुंचाने का अवसर देते हैं। इससे स्थानीय कारोबार
