से घिरी ढाणियों से परिवारों और पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुट गए।
दूसरी ओर, मिट्टी से भरी बोरियों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की मदद से नहर के कटाव को बंद
ग्रामीणों के मुताबिक, सुबह नहर में पानी का स्तर करीब 13 फीट था। कटाव होने
के बाद भी मौके पर लगभग 8 फीट पानी का बहाव बना हुआ है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि
जल्द ही पानी का बहाव पूरी तरह नहीं रोका गया तो हजारों एकड़ कृषि भूमि और सैकड़ों
मकानों को भारी नुकसान हो सकता है। अधिकारियों के अनुसार, नहर में पानी का बहाव पूरी
तरह बंद होने में शनिवार तक का समय लग सकता है। ऐसे में प्रभावित क्षेत्र के लोगों
नहर के कटाव को बंद करने के लिए कालीरावण और आसपास के गांवों से नरेगा कर्मियों
को मौके पर बुलाया गया है। सिंचाई विभाग के एसडीओ सहित विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मचारी
भी घटनास्थल पर पहुंचकर मरम्मत एवं राहत कार्य में जुटे हैं। ग्रामीणों के सहयोग से
कटाव को भरने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।
नहर टूटने से पूर्व सरपंच प्रभु कस्वां की ढाणी सहित अमर सिंह, महाबीर, बेगराज,
मांगेराम और रामफल की ढाणियां पानी की चपेट में आ गई हैं। कई घरों में पानी भरने से
लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीण अपने जरूरी सामान और पशुधन को बचाने
के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। गांव के पूर्व सरपंच प्रभु कस्वां ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते
हुए कहा कि नहर टूटने के बाद प्रशासन की ओर से समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाते तो नुकसान
फिलहाल कालीरावण में हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। एक तरफ ग्रामीण अपने घरों,
पशुओं और फसलों को बचाने की जद्दोजहद में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ सिंचाई विभाग की
